हे स्वर की देवी माँ वाणी में मधुरता दो

जया किशोरी जी
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे स्वर की देवी माँ वाणी में मधुरता दो,

मैं गीत सुनाती हूँ संगीत की शिक्षा दो.......

सरगम का ज्ञान नही,

ना लय का ठिकाना है,

तुम्हे आज सभा में माँ,

हमे दरश दिखाना है,

संगीत समंदर से सुरताल हमें दे दो,

हे स्वर की देवी माँ वाणी में मधुरता दो,

मैं गीत सुनाती हूँ संगीत की शिक्षा दो.......

शक्ति ना भक्ति है,

सेवा का ज्ञान नही,

तुम्हे आज सुनाने को,

कोई सुन्दर गान नही,

गीतों के खजानो से,

एक गीत मुझे दे दो,

हे स्वर की देवी माँ वाणी में मधुरता दो,

मैं गीत सुनाती हूँ संगीत की शिक्षा दो.......

अज्ञान ग्रसित होकर,

क्या गीत सुनाऊ मैं,

टूटे हुए शब्दो से,

क्या स्वर को सजाऊँ मैं,

तू ज्ञान का स्त्रोत बहा,

माँ मुझपे दया कर दो,

हे स्वर की देवी माँ वाणी में मधुरता दो,

मैं गीत सुनाती हूँ संगीत की शिक्षा दो.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।