हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे हंसवाहिनी, ज्ञान दायिनी,

अम्ब विमल मति दे,

अम्ब विमल मति दे,

जग सिरमौर बनाएँ भारत,

वह बल विक्रम दे,

वह बल विक्रम दे,

हे हंसवाहिनी, ज्ञान दायिनी,

अम्ब विमल मति दे,

अम्ब विमल मति दे.....

साहस शील हृदय में भर दे,

जीवन त्याग-तपोमर कर दे,

संयम सत्य स्नेह का वर दे,

स्वाभिमान भर दे,

स्वाभिमान भर दे,

हे हंसवाहिनी, ज्ञान दायिनी,

अम्ब विमल मति दे,

अम्ब विमल मति दे......

लव-कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम,

मानवता का त्रास हरें हम,

सीता, सावित्री, दुर्गा मां,

फिर घर-घर भर दे,

फिर घर-घर भर दे,

हे हंसवाहिनी, ज्ञान दायिनी,

अम्ब विमल मति दे,

अम्ब विमल मति दे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।