माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे,

वंदन करूँ मैं तेरी हाथों में पुष्प साजे,

माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे,

वंदन करूँ मैं तेरी हाथों में पुष्प साजे......

वीणा वादिनि माँ शारदे,

पुस्तक धारिणी माँ शारदे,

वीणा वादिनि माँ शारदे,

पुस्तक धारिणी माँ शारदे.....

त्रुटि पूर्ण वाणी मेरी इसको तू ही सुधारे,

माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे,

वंदन करूँ मैं तेरी हाथों में पुष्प साजे.....

वीणा बजाकर माँ शारदे,

मेरा गीत अमर कर माँ शारदे,

वीणा बजाकर माँ शारदे,

मेरा गीत अमर कर माँ शारदे,

पुकारे ये भक्त तुझको, मन में तू ही विराजे,

माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे,

वंदन करूँ मैं तेरी हाथों में पुष्प साजे......

पाप की कोई न हो बाते माँ,

बंधन न झूठ का हो कोई माँ,

पाप की कोई न हो बाते माँ,

बांध न झूठ का हो कोई माँ,

अज्ञान को मिटाकर मन ज्ञान तू ही भर दे,

माँ शारदे तू मेरे कंठ में विराजे,

वंदन करूँ मैं तेरी हाथों में पुष्प साजे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।