रे मनवा भजले राम राम राम

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

हे मनवा रे मनवा,

जीवन है संग्राम,

हे मनवा रे मनवा,

जीवन है संग्राम,

भजले राम राम राम,

भजले राम राम राम,

भजले राम राम राम,

भजले राम राम राम,

रे मनवा रे मनवा,

जीवन है संग्राम..........

लोक यही परलोक यही है,

यही धारा ओर व्योम,

यही धारा ओर व्योम,

यही पुरातन नारायण,

है यही सनातन ओम,

यही सनातन ओम,

इससे बड़ा नही कोई नाम,

इससे बड़ा नही कोई नाम,

भजले राम राम राम,

भजले राम राम राम,

भजले राम राम राम,

भजले राम राम राम,

रे मनवा रे मनवा,

जीवन है संग्राम...........

इसके करतब अजब अनोखे,

गजब के इसके खेल,

गजब के इसके खेल,

सूर्य चंद्र के दिप जलाता,

बिन बाती बिन तेल,

बिन बाती बिन तेल,

यही सवारे सारे कम,

यही सवारे सारे कम,

भजले राम राम राम,

भजले राम राम राम,

भजले राम राम राम,

भजले राम राम राम,

रे मनवा रे मनवा,

जीवन है संग्राम...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।