सुन बहना मेरी बहना

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॥ पावन पाठ ॥

।भाई बहन।

सुन बहना,, ओ बहना,

सुन बहना मेरी बहना, ना नम हो कभी तेरे नैना,

खुशी ही खुशी हो चारो तरफ, ना आए कभी दुख की रैना,

सुन बहना ओ बहना.....

सर झुका है जहां, मांगा है बस यही,

तू खुश रहे हमेशा, चाहे रहे कहीं,

सुन बहना मेरी बहना, फूलो सी सदा हंसते रहना,

सुन बहना ओ बहना....

मुझसे कभी न रूठना होना नहीं खफा,

रक्षा बंधन के दिन घर, आती रहे सदा,

सुन बहना मेरी बहना, जब आए सावन का महीना,

सुन बहना ओ बहना....

डॉ सजन सोलंकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।