उचेयां पहाड़ाँ लाया डेरा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

उच्चेयां पहाडां लाया डेरा मेरी माँ शेरांवालिये,

माँ शेरांवालिये माँ मेहरांवालिये,

बच्चेयां नूं वंडदी बथेरा मेरी माँ शेरांवालिये.......

*लाल चुनरिया गोटा किनारी,

आया चढ़ौण पुत्त तेरा, मेरी माँ शेरांवालिये,

उच्चेयां पहाडां लाया डेरा मेरी माँ शेरांवालिये.....

गल विच सोहे फुल्लां दी माला,

गेंदा गुलाब ते कनेरा, मेरी माँ शेरांवालिये,

उच्चेयां पहाडां लाया डेरा मेरी माँ शेरांवालिये.....

चढ़ के चढ़ाईयां हर साल आइये,

पा दे कदे तूं वी फेरा, मेरी माँ शेरांवालिये,

उच्चेयां पहाडां लाया डेरा मेरी माँ शेरांवालिये.....

मैं हां तेरे दर दा दीवाना,

ए ही ठिकाना है मेरा, मेरी माँ शेरांवालिये,

उच्चेयां पहाडां लाया डेरा मेरी माँ शेरांवालिये.....

कौशल नूं माँ चरणी ला लो,

बचड़ा दीवाना है तेरा, मेरी माँ शेरांवालिये,

उच्चेयां पहाडां लाया डेरा मेरी माँ शेरांवालिये.....

लेखक एवं संगीत - श्री शशांक कृष्ण कौशल जी महाराज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।