हो गई मेरी बल्ले बल्ले नोटो से भर गए गल्ले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हो गई मेरी बल्ले बल्ले,

नोटो से भर गए गल्ले,

कुछ दिन में सिर उतरा कर्जा का बोझ ये,

एक लोटा एक लोटा,

एक लोटा गंगा जल से आ गई मेरी मौज रे.....

मेरे होंठों पे आया जब से भोले का नाम,

दुनिया की भाग दौड़ से दिल ने पाया आराम,

दर्शन करने को मंदिर जाता में रोज,

एक लोटा,, गंगा जल से आ गई मेरी मौज रे.....

मांथे पे लगा चमकने भोले बाबा का नूर,

पैसों की तंगी मिट गई मुश्किल भी हो गई दूर,

सारी मुश्किल भी मेरी हो गई जमींदोज रे,

एक लोटा,, गंगा जल से आ गई मेरी मौज रे.....

रातों को आने लगे सपने में भोलेनाथ,

जी भर के होने लगी भोले से दिल की बात,

लिखता है राज अनाड़ी शब्दों को सोच रे,

एक लोटा,, गंगा जल से आ गई मेरी मौज रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।