श्री लक्ष्मी गणेश मंत्र

पारंपरिक
श्री गणेश मंत्र गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

लक्ष्मी-विनायक मंत्र:-

दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्,

धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे,

श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरदे सर्वजनं में वशमानय स्वाहा॥

अमोघ गणेश लक्ष्मी मंत्र:-

ॐ गं गणपति रूप श्री पद्मादेव्यै नमः

मम लक्ष्मी प्राप्ति कुरु कुरु स्वाहा”

श्री गणेश बीज मंत्र:-

ॐ गं गणपतये नमः

गणेश जी को भोग लगाने का मन्त्र:-

शर्कराघृत संयुक्तं मधुरं स्वादुचोत्तमम।

उपहार समायुक्तं नैवेद्यं प्रतिगृह्यतां॥

गणेश वंदना मंत्र:-

वन्‍दहुं विनायक, विधि-विधायक, ऋद्धि-सिद्धि प्रदायकम्।

गजकर्ण, लम्बोदर, गजानन, वक्रतुण्ड, सुनायकम्॥

श्री एकदन्त, विकट, उमासुत, भालचन्द्र भजामिहम।

विघ्नेश, सुख-लाभेश, गणपति, श्री गणेश नमामिहम॥

गणेश प्रार्थना मन्त्र:-

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय,

लंबोदराय सकलाय जगध्दिताय।

नागाननाय श्रुतियग्यविभुसिताय,

गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

किसी भी कार्य के शुरू में गणेश जी को इस मंत्र से प्रसन्न करना चाहिए:-

ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा॥

लक्ष्मी बीज मन्त्र:-

ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः

महालक्ष्मी मन्त्र:-

श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

लक्ष्मी गायत्री मन्त्र:-

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि,

तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।