अगर दिल किसी का दुखाया ना होता

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॥ पावन पाठ ॥

अगर दिल किसी का,

दुखाया ना होता,

अगर दिल किसी का,

दुखाया ना होता,

तो सदमों का तीर दिल पे,

ये खाया ना होता,

अगर दिल किसी का.......

तेरी जिंदगी में,

ना होता अँधेरा,

जो दिया दूसरों का,

बुझाया ना होता,

अगर दील किसी का,

दुखाया ना होता.....

ना होता ज़माने में,

कभी घर से बेघर,

जो घर दूसरों का,

जलाया ना होता,

अगर दील किसी का,

दुखाया ना होता.......

अगर तू हसता,

दुसरो के दुःख पर,

तो हरी ने तुझे यूँ,

रुलाया ना होता,

अगर दील किसी का,

दुखाया ना होता.......

अगर प्यार तू प्रेम,

करता सभी से,

तो जग में रे कोई,

पराया ना होता,

अगर दील किसी का,

दुखाया ना होता......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।