आधी रात ने बजावे कान्हो बंसी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( वृन्दावन बंसी बजी,

और मोह्या तीनो लोक,

मोबा में आया नहीं,

तो रिया कोण सा लोक॥ )

आधी रात ने बजावे कान्हो बंसी ने,

सोवे ना सोवादे प्यारी गुजरा ने,

ढलती रात ने बजावे कान्हा बंसी ने,

सोवे ना सोवादे प्यारी गुजरा ने.....

ऐसी मोहन बंसी बजाई,

ऐसी रे मोहन बंसी बजाई,

सुण गुजरिया दौड़ी दौड़ी आई,

सुण गुजरिया दौड़ी दौड़ी आई,

कान्हो जादू करयो रे म्हारा तन मन में,

सोवे ना सोवादे प्यारी गुजरा ने,

ढलती रात ने बजावे कान्हा बंसी ने,

सोवे ना सोवादे प्यारी गुजरा ने......

सुण गुजरिया नन्द घर आई,

सुण गुजरिया नन्द घर आई,

कुंवर कन्हैया का हाल सुणाई,

कुंवर कन्हैया का हाल सुणाई,

थोड़ी डांट तो पीला ने थारा लाला ने,

सोवे ना सोवादे प्यारी गुजरा ने,

ढलती रात ने बजावे कान्हा बंसी ने,

सोवे ना सोवादे प्यारी गुजरा ने.......

चन्द्रसखी ब्रज बाल की शोभा,

चन्द्रसखी ब्रज बाल की शोभा,

श्याम दीवाना राधा का होजा,

श्याम दीवाना राधा का होजा,

कान्हो रास रचावे नित मधुवन में,

सोवे ना सोवादे प्यारी गुजरा ने,

ढलती रात ने बजावे कान्हा बंसी ने,

सोवे ना सोवादे प्यारी गुजरा ने.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।