जगमग ज्योत जले माँ तेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले,

तेरी ज्योत जगाकर मैया मन का फूल खिले,

जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले......

जब मै खोलू अखिया अपनी तब हो दर्शन तेरा,

तेरी मूरत देख के मैया सच हो सपना मेरा,

पड़ी रहू दिन रात भवानी ममता की छाव तले,

जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले.....

सात रंग की ज्योति वाला जग में नूर निराला,

कही दिखे तू छोटे रुप में कही दिखे तू ज्वाला,

तू जिसको वर देती भवानी टला नही टले,

जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले.......

जब आव्हान करू मै तेरा दरश मुझे दिखलाना,

इस बालक भक्त के सब दुःख दर्द मिटाना,

सुबह श्याम मै नाम तेरा तेरा ही नाम जपु,

जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।