भर दे झोली मेरी भी शेरावाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भर दे झोली मेरी भी शेरावाली,

तेरे दर से ना जाऊंगा खाली,

बनादे बिगड़ी मेरी भी मेहरो वाली,

तेरे दर से ना जाऊंगा खाली.....

मै मुक्कदर का मारा हु माता,

अपने चरणों से मुझको लगा लो,

दरबदर मै भटकने लगा हु,

दम निकल जायेगा माँ बचालो,

दम निकल जायेगा माँ बचालो,

करदे मुखड़े पे मेरे भी लाली,

तेरे दर से ना जाऊंगा खाली......

मुझको मिलते है हर मोड़ पे माँ,

दिल तोड़ने वाले इस जहाँ में,

टुटके मै बिखर सा गया हु,

आ गया हु कहा से कहा मै,

करदे कृपा हे माँ शेरोवाली,

तेरे दर से ना जाऊंगा खाली......

ब्रम्हा विष्णु महादेव हारे तो,

महिषासुर को मिटाती हो मैया,

शहस्त्र बाहू बढे जब भी पापी,

दुर्गे काली हो जाती हो मैया,

कष्ट मेरे भी माँ हरने वाली,

तेरे दर से ना जाऊंगा खाली......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।