मै तो अर्ज करू गुरु थाने

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॥ पावन पाठ ॥

( परमेश्वर से गुरु बड़े,

तुम देखो वेद पुराण,

सेख परिंदा यु कहे,

तो गुरू घर है भगवान॥ )

मै तो अर्ज करू गुरु थाने,

शरणा में राखो म्हाने,

हेलो तख्त देवू की थाने,

म्हारी लाज शर्म सब थाने,

मै तो अर्ज करू गुरु थाने,

शरणा में राखो म्हाने......

गुरु मात पिता सुख दाता,

सब स्वारथ का है नाता,

एक तारण तिरण गुरु दाता,

ज्यारा चार वेध्द जस गाता,

मै तो अरज करू गुरु थाने,

शरणा में राखो म्हाने......

भवसागर भरियो भारो,

मने सुजत नही रे किनारो,

गुरु घट में दया विचारो,

मैं तो डूब रियो मजधारो,

मै तो अरज करू गुरु थाने,

शरणा में राखो म्हाने......

कोई संत लियो अवतारो,

जीवो ने पार उतारो,

माने आयो भरोसो भारो,

नही छोड़ू शरणों थारो,

मै तो अरज करू गुरु थाने,

शरणा में राखो म्हाने.......

गुरु तन मन धन सब थारो,

चाहे सीस काट लो म्हारो,

जन दरियाराम राम पुकारो,

चरणा रो चाकर थारो,

मै तो अरज करू गुरु थाने,

शरणा में राखो म्हाने......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।