माता पिता आप ही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

माता पिता आप ही,

कुटुम्ब परिवार आप हो,

भाई बन्धु सखा सहायक,

आप ही जीवन का सार हो,

जीवन का उद्धार प्रभु जी,

आप ही के कारण है,

शरणागत की लाज रखते,

आप दीनानाथ जी,

मैं भी आया हूँ शरण में,

सदा निभाना साथ जी,

कर लिया राजीव ने प्रभु जी,

आपके चरणों को धारण है,

जीवन का उद्धार प्रभु जी,

आप ही के कारण है,

आप ही नैया आप ही खिवैया ,

प्रभु जी आप ही पतवार हो,

दीन हीन के भगवन,

आप ही आधार हो,

आप ही से भव तारण है,

जीवन का उद्धार प्रभु जी,

आप ही के कारण है,

क्या राजा क्या रंक फकीर,

सब करते आपकी बंदगी,

आपकी ही शरण में सभी की,

बीत रही है जिन्दगी,

चरण में आयो का,

आप ही दुख हारण हैं,

जीवन का उद्धार प्रभु जी,

आप ही के कारण है॥

राजीव त्यागी नजफगढ़

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।