छोड़ेंगे ना हम तेरा द्वार ओ दाता मरते दम तक

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

छोड़ेंगे ना हम तेरा द्वार,

ओ दाता मरते दम तक,

मरते दम नहीं,

अगले जनम तक,

अगले जनम नहीं,

सात जनम तक,

सात जनम नहीं,

जनम जनम तक,

छोड़ेगे ना हम तेरा द्वार,

ओ बाबा मरते दम तक......

भक्तों पर उपकार किया है,

शुकराना तेरा गा रहे,

देख तेरी शक्ति को जग,

में कोई समझ ना पाया,

दुःख के अँधेरे दूर भगाए,

आस का दीपक मन में जलाए,

नाम जपे तेरा सांस है जबतक,

छोड़ेगे ना हम तेरा द्वार,

ओ दाता मरते दम तक.......

आनंदपुर में आप विराजे,

भक्तों को दर्शन दिखा रहे,

भक्तों की तुम लाज बचाने,

सतगुरु पल भर में आ रहे,

निर्बल को तुम देते सहारा,

हमको है तू प्राणों से प्यारा,

इस धरती से उस अम्बर तक,

छोड़ेगे ना हम तेरा द्वार,

ओ दाता मरते दम तक......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।