वो वृंदावन है मेरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जहाँ प्रभु नाम के सुमिरन का रहता नित नया सवेरा,

वो वृंदावन है मेरा......

यहाँ प्रेम के रंग में रंगी हुई है, हर पत्ती हर डाली,

यह देश है जिसमे संतो की, रहती है नित दीवाली,

यहाँ एक जोत व्यापक है जिसमे नहीं है तेरा मेरा,

वो वृंदावन है मेरा......

यहाँ वो ज्योति योगी जन जिसका, ध्यान सदा धरते है,

जिस ज्योत से सूरज चाँद सितारे, जग चानन करते है,

वही अजर-अमर पावन प्रभु ज्योति, करती दूर अँधेरा,

वो वृंदावन है मेरा......

बिन कानों के यहाँ शब्द सुने, आँखो बिन गुदें माला,

बिन बादल के बूँदे बरसें, बिन सूरज रहे उजाला,

वो दायम कायम सुख जिसमे, संतो ने डेरा डाला,

वो वृंदावन है मेरा......

यहाँ तीन नदी का संगम है जो पाप ताप हरता है,

यहाँ गगन गुफा है भीतर जिसके अमृत रस है झरता,

बिन गुरु किरपा के लग नहीं सकता, जिस धरती पर फेरा,

वो वृंदावन है मेरा......

यहाँ काल माया के अंधकार का दखल नहीं है कोई,

जो सतगुरु देव का प्यारा इस देश में पहुँचे सोई,

विरला गुरुमुख ही दासां, पाता है यहाँ बसेरा,

वो वृंदावन है मेरा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।