एक जोगण मीराबाई थी

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन्नै लादे केसरी बाणा माँ,

मन्नै जोगी के संग जाना माँ,

पहर खड़ाऊ नाचूंगी,

ऐसी रोगण मैं हो गई,

एक जोगण मीराबाई थी,

एक जोगण मैं हो गई......

चाहे सूली सेज चढ़ा दो मां,

चाहे विष का प्याला प्यादो मां,

मेरे जोगी की फटकार लगी,

उस जोगी त मिलवादो मां,

हंसना मन्नै सिखादो मां

हंसना मन्नै सिखादो मां,

दुख भोगण मैं हो गई,

एक जोगन मीराबाई थी,

एक जोगण मैं हो गई......

मन्नै मंदिर मस्जिद छान लिए,

घणी घूमी गुरुद्वारा म,

मन्नै इसी बावली कर राखी,

मन्नै मां दिख स सारा म,

मंगती बण क मांगू सू,

ऐसी जोगण में हो गई,

एक जोगन मीराबाई थी,

एक जोगण मैं हो गई......

मेरी सखी सहेली पूछ तो,

फक्कड़ मरजाना बता दियो,

औरंगनगर के श्मशाना म,

मेरा ठिकाना बता दियो,

जोग स जोग न मिला दियो,

संजोगण में हो गई,

एक जोगन मीराबाई थी,

एक जोगण मैं हो गई.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।