मैं तो अमर चुनड़ी ओढू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( मीरा जनमी मेड़ते

वा परणाई चित्तोड़,

राम भजन प्रताप सु,

वा शक्ल सृष्टि शिरमोड,

शक्ल सृष्टि शिरमोड,

जगत मे सहारा जानिये,

आगे हुई अनेक कई बाया कई रानी,

जीन की रीत सगराम कहे,

जाने में खोर,

तीन लोक चौदाह भवन में,

पोछ सके ना कोई,

ब्रह्मा विष्णु भी थक गया,

शंकर गया है छोड़॥ )

धरती माता ने वालो पेरु घाघरो,

मैं तो अमर चुनड़ी ओढू,

मैं तो संतो रे भेली रेवू,

आधु पुरुष वाली चैली जी....

चाँद सूरज म्हारे अंगडे लगाऊ,

में तो झरणा रो झांझर पेरु,

मैं तो संतो रे भेली रेवू,

आधु पुरुष वाली चैली जी......

नव लख तारा म्हारे अंगडे लगाऊ,

मैं तो जरणा रो झांझर पेरु,

मैं तो संतो रे भेली रेवू,

आधु पुरुष वाली चैली जी.....

नव कोली नाग म्हारे चोटीया सजाऊ,

जद म्हारो माथो गुथाऊ,

मैं तो संतो रे भेली रेवू,

आधु पुरुष वाली चैली जी.....

ग्यानी ध्यानी बगल में राखु,

हनुमान वालो कोकण पेरू,

मैं तो संतो रे भेली रेवू,

आधु पुरुष वाली चैली जी......

भार सन्देश में अदकर बांदु,

मैं डूंगरवाली डोडी में खेलु,

मैं तो संतो रे भेली रेवू,

आधु पुरुष वाली चैली जी......

दोई कर जोड़ एतो मीरो बाई बोले,

मैं तो गुण सावरिया रा गावु,

मैं तो संतो रे भेली रेवू,

आधु पुरुष वाली चैली जी......

धरती माता ने वालो पेरु घाघरो,

मैं तो अमर चुनड़ी ओढू,

मैं तो संतो रे भेली रेवू,

आधु पुरुष वाली चैली जी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।