अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मंजीरो सीतार मीरा ये लिना हाथ,

मंजीरो सीतार मीरा ऐ लिना हाथ,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ......

सोना री ईडाणी थारी रूपा रो घडोलो,

सोना री ईडाणी थारी रूपा रो घडोलो,

अब पानीडो भरूतो मारे गिरधर वर रे काज,

अब पानीडो भरूतो मारे गिरधर वर रे काज,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ,

मंजीरो सीतार मीरा ऐ लिना हाथ,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ......

रेशम रा कपड़ा थारा मारे नही चहिजे राणा,

रेशम रा कपडा थारा मारे नही चहिजे,

अरे भगवी चादर ओडने मै हरी भजन मे जाय,

अरे भगवी चादर ओडने मै हरी भजन मे जाय,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ,

मंजीरो सीतार मीरा ऐ लिना हाथ,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ......

हिरा माणक थारा मारे नही चहिजे राणा,

हिरा माणक थारा मारे नही चहिजे,

अरे तुलसी री माला पेरने मै हरी भजन मे जाय,

तुलसी री माला पेरने मै हरी भजन मे जाय,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ,

मंजीरो सीतार मीरा ऐ लिना हाथ,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ......

बाई मीरा केवे प्रभु श्याम ने भजले राणा,

बाई मीरा केवे प्रभु श्याम ने भजले,

अरे भाव सु भजे ज्यारो बेडो करसी पार,

अरे भाव सु भजे ज्यारो बेडो करसी पार,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ,

मंजीरो सीतार मीरा ऐ लिना हाथ,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ......

मंजीरो सीतार मीरा ये लिना हाथ,

मंजीरो सीतार मीरा ऐ लिना हाथ,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ,

अब राणाजी ने कहिजो के गिरधर मारो नाथ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।