प्रेयसी दो अंतिम बार विदा

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

आज सेवक तेरा ये रण में चला,

प्रेयसी दो अंतिम बार विदा,

यह सेवक ऋणी तुम्हारा है,

तुम भी जानो, मैं भी जानूं,

यह अंतिम मिलन हमारा है,

मैं मातृ चरण से दूर चला,

इसका दारुण संताप मुझे,

पर यदि कर्तव्य विमुख होवुंगा,

जीने से लगेगा पाप मुझे,

अब हार जीत का प्रश्न नहीं,

जो भी होगा अच्छा होगा,

मरकर ही सही, पितु के आगे,

बेटे का प्यार सच्चा होगा,

भावुकता से कर्तव्य बड़ा,

कर्तव्य निभे बलिदानों से,

दीपक जलने की रीत नहीं,

छोड़े डरकर तूफानों से,

यह निश्चय कर बढ़ चला वीर,

कोई उसको रोक नहीं पाया,

चुपचाप देखता रहा पिता,

माता का अंतर भर आया,

चुपचाप देखता रहा पिता,

माता का अंतर भर आया॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।