कोई लाख करे चतुराई कर्म का लेख मिटे ना रे भाई

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॥ पावन पाठ ॥

कोई लाख करे चतुराई, कर्म का लेख मिटे ना रे भाई ।

ज़रा समझो इसकी सच्चाई रे, कर्म का लेख मिटे ना रे भाई ॥

इस दुनिया में भाग्य के आगे चले ना किसी का उपाय ।

कागद हो तो सब कोई बांचे, कर्म ना बांचा जाए ।

इस दिन इसी किस्मत के कारण वन को गए थे रघुराई रे ॥

काहे मनवा धीरज खोता, काहे तू ना हक़ रोए ।

अपना सोचा कभी ना होता, भाग्य करे तो होए ।

चाहे हो राजा चाहे भिखारी, ठोकर सभी ने यहाँ खायी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।