क्या फूल चढ़ाऊँ मैं प्रभु के चरणों में

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॥ पावन पाठ ॥

क्या फूल चढ़ाऊँ मैं,

प्रभु के चरणों में,

कहाँ कैसे क्या उपहार दूँ,

मैं समझ ना पाऊँ,

मुझे बता दे प्यारे प्रभु,

क्या पसंद है मेरे प्रभु,

उसे तोड़ लाऊँ तेरे लिए,

उसे चुन लाऊँ तेरे लिए,

उसे तोड़ लाऊँ तेरे लिए,

उसे चुन लाऊँ तेरे लिए......

मेरा ये जीवन तुझपे समर्पण,

करती हूँ मैं प्रभु तेरे लिए,

उसे तोड़ लाऊँ तेरे लिए,

उसे चुन लाऊँ तेरे लिए,

उसे तोड़ लाऊँ तेरे लिए,

उसे चुन लाऊँ तेरे लिए......

रोटी अदाखरस प्रभु को अर्पण,

ग्रहण कर ले पावन बना दे,

उसे तोड़ लाऊँ तेरे लिए,

उसे चुन लाऊँ तेरे लिए,

उसे तोड़ लाऊँ तेरे लिए,

उसे चुन लाऊँ तेरे लिए.....

थाली में फल फूल लाए है हम,

प्रभु के चरणों में,

उसे तोड़ लाऊँ तेरे लिए,

उसे चुन लाऊँ तेरे लिए,

उसे तोड़ लाऊँ तेरे लिए,

उसे चुन लाऊँ तेरे लिए......

क्या फूल चढ़ाऊँ मैं,

प्रभु के चरणों में,

कहाँ कैसे क्या उपहार दूँ,

मैं समझ ना पाऊँ,

मुझे बता दे प्यारे प्रभु,

क्या पसंद है मेरे प्रभु,

उसे तोड़ लाऊँ तेरे लिए,

उसे चुन लाऊँ तेरे लिए,

उसे तोड़ लाऊँ तेरे लिए,

उसे चुन लाऊँ तेरे लिए......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।