माँ ही मंदिर माँ ही पुजा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

( रमता जोगी बहता पानी,

माँ की कहे कहानी,

माँ का नाम सदा रहता है,

बाकी सब कुछ फ़ानी॥ )

माँ ही मंदिर माँ ही पूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ से बढ़ के कोई न दूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ ही मंदिर.....

माँ के पुण्य से जगत बना है,

ईश्वर को भी माँ ने जना है,

माँ ममता का एक कलश है,

जीवन ज्योत है अमृत रस है,

क्या अम्बर और क्या ये धरती,

माँ की तुलना हो नहीं सकती,

युग आते है युग जाते है,

माँ की गाथा दोहराते है,

माँ की गाथा दोहराते है,

बड़े बड़े ग्यानी कहते है,

माँ का रुतबा सबसे ऊँचा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ से बढ़ के कोई न दूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ ही मंदिर.......

मिट्टी हो गयी माँ की काया,

भटक रहा है फिर भी साया,

कड़ी धुप में सोच रही है,

लाल पे अपने कर दू छाया,

शूल बनी है माँ की विवशता,

व्याकुल है सूझे ना रस्ता,

व्याकुल है सूझे ना रस्ता,

सरल बहुत है कहना सुनना,

कठिन बड़ा ही हैं माँ बनना,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ से बढ़ के कोई न दूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ ही मंदिर.......

जनम जनम की माँ दुखियारी,

करके हर कोशिश ये हारी,

भई बावरी उलझ गयी है,

बच्चे का सुख ढूंढ रही है,

भूख से मुन्ना तड़प रहा है,

मन का धीरज टूट गया है,

आँचल में है दूध की नदिया,

और आँखों मे नीर भरा है,

और आँखों मे नीर भरा है,

सब को सहारा देने वाली,

कौन बने अब तेरा सहारा,

कौन बने अब तेरा सहारा,

कौन बने अब तेरा सहारा,

माँ ही मंदिर माँ ही पूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ से बढ़ के कोई न दूजा,

माँ ही मंदिर माँ ही पुजा,

माँ ही मंदिर......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।