शिरडी के स्वामी देखो आए है पुजारी

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॥ पावन पाठ ॥

शिरडी के स्वामी देखो आए है पुजारी,

भर दो मुरादों से ये झोलियाँ हमारी,

शिरडी के स्वामी देखो आए है पुजारी.......

पड़े हिरे मोती है तेरे खजाने में,

तेरे सिवा और नहीं अपना ज़माने में,

आजमा के देख लिया संसार सारा,

दुःख में ना साथ दिया किसी ने हमारा,

दिन हिन दुखियों के तुम हितकारी,

शिरडी के स्वामी देखो आए है पुजारी.......

सबके ही कांटो कर देते फूल हो,

क्यों फिर हमारी सुध लेना गए भूल हो,

पोंछ भी दो आंसू बाबा आके हमारे,

कर्जदार रहेंगे सदा ही तुम्हारे,

हमने तो महिमा सुनी बहुत तुम्हारी,

शिरडी के स्वामी देखो आए है पुजारी.......

तेरी दहलीज से ये सिर दिया जोड़ है,

नैया को तुम्हारे ही सहारे दिया छोड़ है,

दास्ताँ अपनी सुनाने को आए है,

तेरा निर्दोष प्यार पाने को आए है,

तारो हमें जैसे तारी दुनिया ये सारी,

शिरडी के स्वामी देखो आए है पुजारी.......

हमको भी साईं कुछ धुनि की भभूति दो,

मिटे अंधकार ऐसी करुणा की ज्योति दो,

खाली इस हाथ को सुखो से भर दो,

दुःख संताप सारे जिंदगी के हर लो,

हुई है मुसीबतों की गठरी भारी,

शिरडी के स्वामी देखो आए है पुजारी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।