शिव शंकर चले रे कैलाश

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव शंकर चले रे कैलाश,

की बुंदिया पड़ने लगी,

भोले बाबा चले रे कैलाश,

की बुंदिया पड़ने लगी,

गौरा जी ने बोए दई हरी हरी मेहन्दी,

भोले बाबा ने बोए दई भांग,

की बुंदिया पड़ने लगी,

शिव शंकर चले......

गौरा जी ने सिच दई हरी हरी मेहन्दी,

भोले बाबा ने सिच दई भांग,

की बुंदिया पड़ने लगी,

शिव शंकर चले ...

गौरा जी ने काट लई हरी हरी मेहन्दी,

भोले बाबा ने काट लई भांग,

की बुंदिया पड़ने लगी,

शिव शंकर चले ....

गौरा जी ने पीस लई हरी हरी मेहन्दी,

भोले बाबा ने घोट लई भांग,

की बुंदिया पड़ने लगी,

शिव शंकर चले .....

गौरा जी की रच गई हरी हरी मेहन्दी,

भोले बाबा को चढ़ गई भांग,

की बुंदिया पड़ने लगी,

शिव शंकर चले.......

शिव शंकर चले रे कैलाश,

की बुंदिया पड़ने लगी,

भोले बाबा चले रे कैलाश,

की बुंदिया पड़ने लगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।