खाटु माहि बैठ्यो सांवरो सारो खेल रचावे है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – चाँद सितारे फूल और खुशबु

कीड़ी ने कण हाथी ने मण,

सगलो हिसाब चुकावे है,

खाटु माहि बैठ्यो सांवरो,

सारो खेल रचावे है,

खाटु माहि बैठ्यो सांवरो,

सारो खेल रचावे है.......

जो जल में रेवे जीव जंतु,

वे जल में सब कुछ पावे है,

जो रवे हैं ई धरती पर,

वेई धरती सु पावे है,

ज्यारी जितनी चोंच होवे,

ज्यारी जितनी चोंच होवे,

बितणो ही चुगो चुगावे है,

खाटु माहि बैठ्यो सांवरो,

सारो खेल रचावे है.......

सरकारा तो है देखी घणी,

पर या सरकार अनोखी है,

इने नोट वोट ना कुरसी चाहे,

चाहे भावना चोखी है,

कठपुतलियां हाँ इन हाथा री,

कठपुतलियां हाँ इन हाथा री,

यो ही नाच नचावे है,

खाटु माहि बैठ्यो सांवरो,

सारो खेल रचावे है,

खाटु माहि बैठ्यो सांवरो,

सारो खेल रचावे है.......

बगुला रो भोजन मछली मांस,

और हंस तो मोती खावे है

और जैसो हो स्वभाव जियांको,

वैसी बोली पावे है,

रंग एक है काग कोयल रो,

रंग एक है काग कोयल रो,

वाणी भेद बतावे है,

खाटु माहि बैठ्यो सांवरो,

सारो खेल रचावे है,

खाटु माहि बैठ्यो सांवरो,

सारो खेल रचावे है.......

कीड़ी ने कण हाथी ने मण,

सगलो हिसाब चुकावे है,

खाटु माहि बैठ्यो सांवरो,

सारो खेल रचावे है,

खाटु माहि बैठ्यो सांवरो,

सारो खेल रचावे है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।