मैं तो बरसाने कुटियाँ बनाऊगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो बरसाने कुटियाँ बनाऊगी सखी,

रह जाऊगी सखी,

मैं तो बरसाने झोपड़ी बनाऊगी सखी,

रह जाऊगी सखी......

श्री जी के महलो से रज लेके आउगी,

पिली पोखर का जल भी मिलवाऊगी,

संतो को बुलवा कर मैं नीर धारूगी,

मैं तो बरसाने कुटियाँ बनाऊगी सखी......

झोपड़ी सजेगी मेरी राधा राधा नाम से,

चन्दन मंगाऊगी मैं सखियों के गाव से,

भईया गोकुल आकर कीर्तन करवाउंगी,

मैं तो बरसाने कुटियाँ बनाऊगी सखी.......

भजन करुगी सारी रेहन न मैं सोऊगी,

दरवाजा बंद करके जोर से मैं रोऊगी,

दरवाजा बंद करके भाव में मैं रोऊगी,

मेरी चीखे सुनकर के वो रुक नही पाएगी ,

मेरी आहे सुनकर के वो रुक नही पाएगी,

मैं तो बरसाने कुटियाँ बनाऊगी सखी.......

आएगी किशोरी जी तो भोग मैं बनाउंगी,

लाडली न रोकेगी मैं चवर धुलाऊगी,

वो शेन में जाएगी मैं चरण दबाऊगी,

वो शेन में जाएगी मैं भाव सुनाऊगी,

मैं तो बरसाने कुटियाँ बनाऊगी सखी.......

ढोलकी बजाये हरिदासी बड़े जोर से,

भाव सुने है ब्रिजवासी बड़े गोर से,

मैं मन ही मन इनके चरणन विछ जाऊगी,

मैं तो बरसाने कुटियाँ बनाऊगी सखी,

मैं तो बरसाने कुटियाँ बनाऊगी सखी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।