आखिर एक दिन जाणो रे मालिक रे दरबार

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

हंसा सुन्दर काया रो,

मत करजे अभिमान,

आखिर एक दिन जाणो रे,

मालिक रे दरबार,

आखिर एक दिन जाणो रे,

सायब रे दरबार......

गरब वास मे दुख पायो,

जद हरि से करी पुकार,

पल भर बुलु नाहि रे,

कोल वचन किरतार,

हंसा सुन्दर काया रो,

मत करजे अभिमान,

आखिर एक दिन जाणो रे,

मालिक रे दरबार.......

आकर के संसार मे,

कभी ना भजियो राम,

तिरथ वरत ना किनो रे,

नही कीनो सुकरत काज,

हंसा सुन्दर काया रो,

मत करजे अभिमान,

आखिर एक दिन जाणो रे,

मालिक रे दरबार.......

कुटम कबिलो देख के,

गरब कीयो मन माय,

हंश अकेलो जासी रे,

कोय नही संग मे जाय,

हंसा सुन्दर काया रो,

मत करजे अभिमान,

आखिर एक दिन जाणो रे,

मालिक रे दरबार.......

राम नाम री बान्ध गाठडी,

कर ले सुकरत कार,

कहै कबीर सुनो भाई साधु,

आखिर आसी राम,

हंसा सुन्दर काया रो,

मत करजे अभिमान,

आखिर एक दिन जाणो रे,

मालिक रे दरबार.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।