हरे शिव शंकर कष्ट सारे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हरे शिव शंकर कष्ट सारे,

चला आ शिव की,

चला आ शिव की तू शरण में,

काम सब बिगड़े वो सँवारे,

हरे शिव शंकर कष्ट सारें,

हरे शिव शंकर कष्ट सारे......

हरे शिव शंकर कष्ट सारें,

हरे शिव शंकर कष्ट सारें,

है ये जीवन की,

है ये जीवन की नैया तेरी,

लगाएंगे शिव ही किनारे,

हरे शिव शंकर कष्ट सारें,

हरे शिव शंकर कष्ट सारे......

वही भव से तुझे पार उतारे,

वही भव से तुझे पार उतारे,

नहीं है शिव बिन,

नहीं है शिव बिन कोई सहारा,

उन्ही का तू ही ध्यान लगा रे,

हरे शिव शंकर कष्ट सारें,

हरे शिव शंकर कष्ट सारे......

है घट घट में उनके उजारे,

है भेद अगम वो,

है भेद अगम वो अंतर्यामी,

नाम जप उनका क्या विचारे,

हरे शिव शंकर कष्ट सारें,

हरे शिव शंकर कष्ट सारे.......

है शिव शंकर तेरे परम सहारे,

है शिव शंकर तेरे परम सहारे,

है सब भक्तो से,

है सब भक्तो से शिव का नाता,

वो हर लेते दुःख जो पुकारे,

हरे शिव शंकर कष्ट सारें,

हरे शिव शंकर कष्ट सारे......

मिले सब तुझको प्रभु के द्वारे,

मिले सब तुझको प्रभु के द्वारे,

बसा ले अपने,

बसा ले अपने हृदय शिव को,

कहे धीरान तू सुनले प्यारे,

हरे शिव शंकर कष्ट सारें,

हरे शिव शंकर कष्ट सारे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।