सांवल सा गिरधारी

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सांवल सा गिरधारी,

भला हो रामा सांवल सा गिरधारी,

भरोसो भारी,

हरी बिना मोरी,

गोपाल बिना मोरी,

सांवल सेठ बिना मोरी,

कुण खबर लेवे म्हारी,

सांवल सा गिरधारी.......

लटपट पाग केशरिया जामा,

लटपग पाग जारी रा जामा,

हिवड़े रो हार हज़ारी,

भला हो रामा हिवड़े रो हार हज़ारी,

हरी बिना मोरी,

गोपाल बिना मोरी,

सांवल सेठ बिना मोरी,

कुण खबर लेवे म्हारी,

सांवल सा गिरधारी.......

मोर मुकुट सिर छत्र विराजे,

मोर मुकुट हरी रे छत्र विराजे,

कुंडल की छवि न्यारी,

भला हो रामा कुंडल की छवि न्यारी,

हरी बिना मोरी,

गोपाल बिना मोरी,

सांवल सेठ बिना मोरी,

कुण खबर लेवे म्हारी,

सांवल सा गिरधारी.......

वृंदावन में धेनु चरावे,

मधुबन में धेनु चरावे,

बंसी बजावे गिरवर धारी,

भला हो रामा मुरली बजावे छत्तरधारी,

हरी बिना मोरी,

गोपाल बिना मोरी,

सांवल सेठ बिना मोरी,

कुण खबर लेवे म्हारी,

सांवल सा गिरधारी.......

वृंदावन में रास रच्यो है,

मधुबन में रास रच्यो है,

शस्त्र गोद्या विच गिरधारी,

भला हो रामा रास रचावे गिरवरधारी,

हरी बिना मोरी,

गोपाल बिना मोरी,

सांवल सेठ बिना मोरी,

कुण खबर लेवे म्हारी,

सांवल सा गिरधारी......

वृंदावन की कुञ्ज गलिन में,

मधुबन की कुञ्ज गलिन में,

खेलत राधे प्यारी,

भला हो रामा खेलत कृष्णमुरारी,

हरी बिना मोरी,

गोपाल बिना मोरी,

सांवल सेठ बिना मोरी,

कुण खबर लेवे म्हारी,

सांवल सा गिरधारी.......

इंद्र कोप किया ब्रज ऊपर,

इंद्र कोप कियो ब्रज ऊपर,

नख पर गिरवरधारी,

भला हो रामा नख पर गिरवरधारी,

हरी बिना मोरी,

गोपाल बिना मोरी,

सांवल सेठ बिना मोरी,

कुण खबर लेवे म्हारी,

सांवल सा गिरधारी......

औरन तो और भरोसो,

औरन तो और भरोसो,

हमको तो आस तिहारी,

भला हो रामा हमको भरोसो भारी,

हरी बिना मोरी,

गोपाल बिना मोरी,

सांवल सेठ बिना मोरी,

कुण खबर लेवे म्हारी,

सांवल सा गिरधारी.......

बाई मीरा के प्रभु गिरधर नागर,

बाई मीरा के प्रभु नटवर नागर,

चरण कमल बलिहारी,

भला हो रामा हरी के चरण बलिहारी,

हरी बिना मोरी,

गोपाल बिना मोरी,

सांवल सेठ बिना मोरी,

कुण खबर लेवे म्हारी,

सांवल सा गिरधारी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।