चलो री सखी फागुन फ़ाग मनाने

पूनम यादव
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चलो री सखी, चलो री सखी,

चलो री सखी फागुन फाग मनाने,

चलो री सखी फागुन फाग मनाने,

नन्द गाँव गोकुल यमुना तट,

निधिबन या बरसाने,

चलो री सखी, चलो री सखी,

चलो री सखी फागुन फाग मनाने......

कुञ्ज कुंज छाई हरियाली,

फूल रही है डाली डाली,

कुञ्ज कुंज छाई हरियाली,

फूल रही है डाली डाली,

नाचे मोर चकोर पपीहा,

झूम पड़े मस्ताने,

चलो री सखी, चलो री सखी,

चलो री सखी फागुन फाग मनाने......

श्री वृंदावन रस की धारा,

यह रस लोचत है जग सारा,

श्री वृंदावन रस की धारा,

यह रस लोचत है जग सारा,

राधे राधे, गोविन्द राधे,

धुन में नाचे दीवाने,

चलो री सखी, चलो री सखी,

चलो री सखी फागुन फाग मनाने......

रंग रंगीला बरस रहा है,

मधुप बेचारा तरस रहा है,

थिरक रहे पांवों में घुंघरू,

नैनन प्यास बुझाने,

चलो री सखी, चलो री सखी,

चलो री सखी फागुन फाग मनाने.....

नन्द गाँव गोकुल यमुना तट,

निधिबन या बरसाने,

चलो री सखी, चलो री सखी,

चलो री सखी फागुन फाग मनाने......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।