आसमाँ को छू कर देखा

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी.....

क्या करूँ और क्या नहीं?

बात किसी से कही नहीं,

मौज-मस्ती की आदत मेरी,

बचपन से गई नहीं,

पागलपन ये कैसा है?

काम ये जैसा-तैसा है,

सोच की नज़ाकत है, थोड़ी सी शरारत है,

टेढ़ा ये सामान क्यूँ है? आफ़त में जान क्यूँ है?

मच रहा बवाल क्यूँ है? उलटा ये दिमाग क्यूँ है?

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी.....

ये, ये, ये आँख मिचौली, चोर, डाकू, भूत टोली,

बम-बम बजरंगबली, महाबली, महाबली,

खलबली ही खलबली, देखो है हो चली,

धरती, सागर, तारे, राज मेरा ही प्यारे,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी.....

क्या करूँ और क्या नहीं?

बात किसी से कही नहीं,

मौज-मस्ती की आदत मेरी,

बचपन से गई नहीं,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी.....

पागलपन ये कैसा है?

काम ये जैसा-तैसा है

सोच की नज़ाकत है, थोड़ी सी शरारत है,

टेढ़ा ये सामान क्यूँ है? आफ़त में जान क्यूँ है?

मच रहा बवाल क्यूँ है? उलटा ये दिमाग क्यूँ है?

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी.....

ये, ये, ये आँख मिचौली, चोर, डाकू, भूत टोली,

बम-बम बजरंगबली, महाबली, महाबली,

खलबली ही खलबली, देखो है हो चली,

धरती, सागर, तारे, राज मेरा ही प्यारे,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी.....

क्या करूँ और क्या नहीं?

बात किसी से कही नहीं,

मौज-मस्ती की आदत मेरी,

बचपन से गई नहीं,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी,

आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी,

चाँद पर भी नाचें हम, की तूफ़ानों से यारी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।