मेरे शंभू मेरे संग रहना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे शंभू मेरे संग रहना,

मेरे शंभू मेरे संग रहना,

मैने तेरी कृपा से,

सीखा है दु:ख सुख सेहना......

हाँ तू बिन बोले सब देता,

बदले में कुछ भी ना लेता,

तेरी कृपा हम पर बरसे,

तुझसे मिलने को हम तरसे,

तेरे दर आके आये चैना,

तेरे दर आके आये चैना,

हो जपता रहूँ बाबा,

तेरी माला मेरी गहना,

मेरे शंभू मेरे संग रहना,

मेरे शंभू मेरे संग रहना,

मैने तेरी कृपा से,

सीखा है दु:ख सुख सेहना......

जो भी है तेरा है,

कुछ भी ना मेरा है,

बिन तेरे कुछ भी नहीं,

तेरी मैं दुनिया में,

देखूँ जहाँ भी,

तो पता हूँ तुझको वहीँ,

मेरी करे रखवाली शम्भु,

तुन्ने है संभाली शम्भु,

किश्ती मेरी कभी डूबे ना,

हो दीप फतेह तेरा हुआ,

दूर अँधेरा हुआ,

तेरे नाम वाला दिया बुझे ना,

हो तेरे रंग वाला चोला पहना,

तेरे रंग वाला चोला पहना,

तुन्ने ही बनायी दुनिया,

तेरी दुनिया का क्या कहना,

मेरे शंभू मेरे संग रहना,

मेरे शंभू मेरे संग रहना,

मैने तेरी कृपा से,

सीखा है दु:ख सुख सेहना.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।