दो दिन की जिंदगानी रे

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

दो दिन की जिंदगानी रे प्राणी काहे,

करे तू गुमान रे,

करे तू गुमान रे अरे इंसान रे,

जीवन बहता पानी रे प्राणी काहे,

करे तू गुमान रे......

धन और दौलत बड़ा ही कमाया,

इस माया ने हरि को भुलाया,

माया तो आनी है जानी रे प्राणी काहे,

करे तू गुमान रे,

जीवन बहता पानी रे प्राणी काहे,

करे तू गुमान रे.......

काया पे काहे मान करे है,

इस पे तू काहे अभिमान करे है,

रहता ना रूप जवानी रे प्राणी काहे,

करे तू गुमान रे,

जीवन बहता पानी रे प्राणी काहे,

करे तू गुमान रे......

मोह माया से प्रीत हटा ले,

हरि नाम से प्रीत लगा ले,

छोड़ दे यह मनमानी रे प्राणी काहे,

करे तू गुमान रे,

जीवन बहता पानी रे प्राणी काहे,

करे तू गुमान रे.......

दो दिन की जिंदगानी रे प्राणी काहे,

करे तू गुमान रे,

करे तू गुमान रे अरे इंसान रे,

जीवन बहता पानी रे प्राणी काहे,

करे तू गुमान रे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।