दीन दयाल भरोसे तेरे

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

दीन दयाल भरोसे तेरे,

दीन दयाल भरोसे तेरे,

सब परिवर चढ़ाया बेड़े,

सब परिवर चढ़ाया बेड़े......

राम जपोजी ऐसे ऐसे,

राम जपोजी ऐसे ऐसे,

द्रु प्रलहद जपो हर जैसे,

द्रु प्रलहद जपो हर जैसे,

दीन दयाल भरोसे तेरे,

दीन दयाल भरोसे तेरे,

सब परिवर चढ़ाया बेड़े,

सब परिवर चढ़ाया बेड़े.......

जाट गौरव ता हुक्म मानावे,

जाट गौरव ता हुक्म मानावे,

है बेड़े को पैर लंगावे,

है बेड़े को पैर लंगावे,

दीन दयाल भरोसे तेरे,

दीन दयाल भरोसे तेरे,

सब परिवर चढ़ाया बेड़े,

सब परिवर चढ़ाया बेड़े....

गुर परसाद असि बुद्ध समानी,

गुर परसाद असि बुद्ध समानी,

छुक गइ फेर अवान जानी,

छुक गइ फेर अवान जानी,

दीन दयाल भरोसे तेरे,

दीन दयाल भरोसे तेरे,

सब परिवर चढ़ाया बेड़े,

सब परिवर चढ़ाया बेड़े.....

कहो कबीर पज सरंग पाणि,

कहो कबीर पज सरंग पाणि,

गुर वार पार सब एको दानी,

या युद्ध परा सब एको दानी,

दीन दयाल भरोसे तेरे,

दीन दयाल भरोसे तेरे,

सब परिवर चढ़ाया बेड़े,

सब परिवर चढ़ाया बेड़े.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।