सारा जग झूठा ही झूठा

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॥ पावन पाठ ॥

तुझे मैं क्या चढ़ाऊं भगवान ए सारा झूठा ही झूठा है।

अगर मैं जल चढ़ाता हूं तो जल मछली का झूठा है।

तुझे मैं क्या चढ़ाऊं भगवान ए सारा जग ही झूठा है।।

अगर मैं दूध चढ़ाता हूं तो दूध बछड़े का झूठा है ।

तुझे मैं क्या चढ़ाऊं भगवान ए सारा जग ही झूठा है।।

अगर मैं फल चढ़ाता हूं तो फल पंछी का झूठा है।

तुझे मैं क्या चढ़ाऊं भगवान ए सारा जग ही झूठा है।।

अगर मैं फूल चढ़ाता हूं तो फूल भौंरे का झूठा है ।

तुझे मैं क्या चढ़ाऊं भगवान ए सारा जग ही झूठा है।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।