सावन आयो आवो नंदलाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( काजलिया रे रेख ज्यू,

थाने पतिया लिखू सजाय,

आणो वेतो आईजा मोहन,

मारो सावन बीतो ज्याय || )

सावन आयो आवो नंदलाल,

नैना बरसे जियो मारो तरसे,

मारा हाल हुआ बेहाल,

सावन आयो आवो नंदलाल.....

संग री सहेलिया मारी झूले बगिया में,

अरे कारज मधुर उतार,

सावन आयो आवो नन्दलाल,

नैना बरसे जियो मारो तरसे,

मारा हाल हुआ बेहाल,

सावन आयो आवो नंदलाल.....

दादुर मोर पपीया बोले,

कोयल करे रे करपाल,

सावन आयो आवो नन्दलाल,

नैना बरसे जियो मारो तरसे,

मारा हाल हुआ बेहाल,

सावन आयो आवो नंदलाल.....

प्रेमी रंग में आ हुई रे दीवानी,

सुनले श्री गोपाल,

कर जोडत्यो ‘रामनिवास’ कहे,

ऐ मेरे दिन दयाल,

सावन आयो आवो नन्दलाल,

नैना बरसे जियो मारो तरसे,

मारा हाल हुआ बेहाल,

सावन आयो आवो नंदलाल......

सावन आयो आवो नंदलाल,

नैना बरसे जियो मारो तरसे,

मारा हाल हुआ बेहाल,

सावन आयो आवो नंदलाल ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।