गगरिया फोड़ दी मेरी

लखबीर सिंह लक्खा
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( माँ यशोदा के पास गोपियाँ रोज़ ही शिकायत लेके आती,

एक दिन एक गोपी आयी, और माँ यशोदा से कन्हैया की शिकायतें कुछ इस तरह करने लगी,

की माँ तेरा ये शरारती ये नटखट, इस कान्हा ने क्या किया है देखो। )

अरी मैया कन्हैयां की शरारत क्या कहूं नटखट की,

मटकिया फोड़ दी मेरी, गगरिया फोड़ दी मेरी,

कि आके पीछे से चुपके से, तेरे इस छलिया ने कान्हा ने,

मटकिया फोड़ दी मेरी.....

अंधेरी रात में आकर, मेरा माखन चुराता है,

ये लडता है झगडता है, मुझे आंख दिखाता है,

चुनरियाँ खीच कर मेरी, वो मारा हाथ घूँघट पट पे,

नथनियाँ तोड़ दी मेरी......

फसा कर मुझको बातौ में, सदा घर पै बुलाती है,

अगर इन्कर करू मईया, शिकायत लेके आती है,

ये झूठी है जमाने भर की मिली थी कल मुझे पनघट पै,

बसुरिया तोड़ दी मेरी.....

ये झगडा गोपी कान्हा का, निराला है अनोखा है,

बिहारी से हां मिलने का सुनहरा ये ही मौका है,

मै बलिहारी री मैं बारी, कन्हैया को बिठाकर घर में,

लगनिया जोड़ दी मेरी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।