डमरू जो बाजे हाथो में

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - चूड़ी जो खनकी हाथो में

डमरू जो बाजे हाथो में,

नाचे धरती और आकाश,

के भोले बाबा नाच रहे,

डमरू जो बाजे हाथो में......

भांग धतुरा भोग लगे,

गल सर्पो की माला है,

गोदी में श्री गणेशजी,

संग में गौरा माता है,

तीनो लोको के स्वामी है,

तीनो लोको के स्वामी है,

ये तो कृपा बाट रहे,

के भोले बाबा नाच रहे,

डमरू जो बाजे हाथो में......

आये जो इनके द्वारे,

करते है वारे न्यारे,

नागो के स्वामी नागेश्वर,

बिगड़े काम बनाते है,

सब की झोली ये आज भरे,

सब की झोली ये आज भरे,

तूम भजन गाओ दिन रात,

के भोले बाबा नाच रहे,

डमरू जो बाजे हाथो में......

ये विश्वास मेरे मन में,

मै शिव का शिव है मुझ में,

नित्य नेम से जो ध्यावे,

भोले है उसके संग में,

देवो के देव महादेव है,

देवो के देव महादेव है,

ये तो विपदा हरते है,

के भोले बाबा नाच रहे,

डमरू जो बाजे हाथो में......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।