तक़दीर मुझे ले चल मैयाजी की बस्ती में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तक़दीर मुझे ले चल मैयाजी की बस्ती में.......

दरबार में हर रंग के दीवाने मिलेंगे,

आपस में बड़े प्यार से बेगाने मिलेंगे,

हर देश से पहुचेंगी दर्शन को निगाहे,

चारो तरफ ही माई के परवाने मिलेंगे,

तक़दीर मुझे ले चल मैयाजी की बस्ती में,

ये उम्र गुजर जाये मैयाजी की बस्ती में,

तक़दीर मुझे ले चल मैयाजी की बस्ती में.......

क्या जाने कोई क्या है मेरी माई का दरबारा,

सबसे बड़ा है जग में मेरी माई का दरबारा,

शहरे जड़े हुए है मायी की रहमतो के,

प्यारा सजा हुआ है मेरी माई का दरबारा,

भगतो की है कतारे माई के दर पे देखो,

दुल्हन सा लग रहा है मेरी माई का दरबारा,

तक़दीर मुझे ले चल मैयाजी की बस्ती में,

ये उम्र गुजर जाये मैयाजी की बस्ती में,

तक़दीर मुझे ले चल मैयाजी की बस्ती में.......

सबसे हसीन देखो मेरी माई का दरबारा,

रहमत का है भंडारा मेरी माई का दरबारा,

तारे करम से सबको मेरी माई का दरबारा,

ममता लुटा रहा है मेरी माई का दरबारा,

अमीर और गरीब सब माँ के दर पे है आते,

रहमत का है खजाना मेरी माई का दरबारा,

तक़दीर मुझे ले चल मैयाजी की बस्ती में,

ये उम्र गुजर जाये मैयाजी की बस्ती में,

तक़दीर मुझे ले चल मैयाजी की बस्ती में......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।