साँवरिया के आगे मैं ऊभो कर जोड़

जया किशोरी जी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - सावन का महिना पवन करे शोर

साँवरिया के आगे,

म्हारे गिरधारी के आगे,

मैं ऊभो कर जोड़,

म्हारी गाड़ी तो संभाले रे,

म्हारों राजा रणछोड़...........

थारे भरोसे साँवरा,

नानी ने परणाई,

थारे ही भरोसे मैं तो,

करयो रे जमाई,

मायरे री तू बेला

तू आजा प्यारा दौड़,

म्हारीं गाड़ी तो संभाले रे,

म्हारों राजा रणछोड़,

साँवरिया के आगे मैं,

ऊभो कर जोड़,

म्हारी गाड़ी तो संभाले रे,

म्हारों राजा रणछोड़......

साधू संत सागे म्हारें,

गद्दी ना रजाई,

घनघोर बन में,

इब तो रात घिर आई,

गाड़ी म्हारीं टूटी,

तू आजा प्यारा दौड़,

म्हारीं गाड़ी तो संभाले रे,

म्हारों राजा रणछोड़,

साँवरिया के आगे मैं,

ऊभो कर जोड़,

म्हारी गाड़ी तो संभाले रे,

म्हारों राजा रणछोड़......

रोकड़ रुपिया कदे,

हाट ना चढ़ायो,

जीवन में नरसी श्याम,

नाम ही कमायो,

हुंडी नरसी ले री,

सिख़राजा माखनचोर,

म्हारीं गाड़ी तो संभाले रे,

म्हारों राजा रणछोड़,

साँवरिया के आगे मैं,

ऊभो कर जोड़,

म्हारी गाड़ी तो संभाले रे,

म्हारों राजा रणछोड़.......

नरसी री टेर काची,

निंदा सूं जगाई,

झट उठ दौड़े ठाकुर,

गाँठड़ी उठाई,

जया भजन सुनावे,

सुने है सिरमौर,

म्हारीं गाड़ी तो संभाले रे,

म्हारों राजा रणछोड़,

साँवरिया के आगे मैं,

ऊभो कर जोड़,

म्हारी गाड़ी तो संभाले रे,

म्हारों राजा रणछोड़......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।