मौजूद है तू मेरी रग रग में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( जब तू साथ नहीं होती तड़पता मेरा दिल है,

मेरी रग रग में लहू के साथ साथ तू भी शामिल है॥ )

मौजूद है तू मेरी रग रग में,

मौजूद है तू मेरी रग रग में,

तू मेरा जीवन तू वजूद मेरा,

तेरे नाम से ही शाम सवेरा....

माला पिरोऊँ हर दम,

मैं तेरे नाम की,

तेरी यादों से है रौनक,

मेरी हर शाम की,

आफ़री तेरी आखें,

आफ़री तेरा जलवा,

आफ़री तेरी बातें,

आफ़री तेरा मिलना,

मौजूद है तू मेरी रग रग में,

मौजूद है तू मेरी रग रग में,

तू मेरा जीवन तू वजूद मेरा,

तेरे नाम से ही शाम सवेरा......

तू है इक चमकता बादल,

तू है आशिकी मेरी,

तू है इक नगीना जैसे,

तू है जिंदगी मेरी,

आफ़री तेरी यादें,

आफ़री तेरा आलम,

आफ़री तेरा रुतबा,

आफ़री तेरा मौसम,

मौजूद है तू मेरी रग रग में,

मौजूद है तू मेरी रग रग में,

तू मेरा जीवन तू वजूद मेरा,

तेरे नाम से ही शाम सवेरा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।