तेरे बन्दे हैं दर किसी और के जाया नहीं जाता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे बन्दे हैं दर किसी और के,

जाया नहीं जाता,

तेरा नाम ना हो, वो तराना,

तेरा नाम ना हो, वो तराना,

गाया नहीं जाता,

तेरे बन्दे हैं दर किसी और के,

जाया नहीं जाता.......

समंदर में सितारों में,

तू कण कण के नज़ारों में,

अंधेरों में उजालों में,

फ़िज़ाओं में बहारों में,

कहाँ आऊँ ऐ मुरली मनोहर,

कहाँ आऊँ ऐ मुरली मनोहर,

आया नहीं जाता,

तेरे बन्दे हैं दर किसी और के,

जाया नहीं जाता.......

तू वेदों में तू ग्रंथों में,

फ़कीरो की अज़ानों में,

दुआओं में निगाहों में,

तरानों में आशियानों में,

जगह कौन सी है वो जिस जगह तू,

पाया नहीं जाता,

तेरे बन्दे हैं दर किसी और के,

जाया नहीं जाता.......

तुम्हीं से ये मेरी खुशियां,

ये दिन महके है चहके से,

पड़ा लहरी शरण तेरी,

तुम्हारे बिन रहे कैसे,

तू जो मिले दुआओं में असर वो,

लाया नहीं जाता,

तेरे बन्दे हैं दर किसी और के,

जाया नहीं जाता........

तेरे बन्दे हैं दर किसी और के,

जाया नहीं जाता,

तेरा नाम ना हो, वो तराना,

तेरा नाम ना हो, वो तराना,

गाया नहीं जाता,

तेरे बन्दे हैं दर किसी और के,

जाया नहीं जाता......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।