निगाहें फेर क्यों बैठे मेरा तो और ना कोई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

निगाहें फेर क्यों बैठे,

मेरा तो और ना कोई,

तुम्हारे लाखों दीवाने,

मेरा तो और ना कोई,

निगाहें फेर क्यो बैठे,

मेरा तो और ना कोई......

अगर तुम मुस्कुराते हो,

तो मैं भी मुस्कुराता हूँ,

मधुर बंशी बजाते हो,

तो मैं भी गुनगुनाता हूँ,

हँसाए तो मैं हँसता हूँ,

मेरा तो और ना कोई,

निगाहें फेर क्यो बैठे,

मेरा तो और ना कोई........

तुम्हारे ही भरोसे तो,

मेरी ये ज़िंदगानी है,

मेरी तो प्रीत बस तुमसे,

तुम्ही को ही निभानी हैं,

कहूँ दिल की बता किस से,

मेरा तो और ना कोई,

निगाहें फेर क्यो बैठे,

मेरा तो और ना कोई.......

मैं रह भी पाउँगा कैसे,

हुए जो दूर तुम मुझसे,

इशारा तो करो कोई,

खता क्या हो गई मुझसे,

रुलाए क्यों मुझे लहरी,

मेरा तो और ना कोई,

निगाहें फेर क्यो बैठे,

मेरा तो और ना कोई.......

निगाहें फेर क्यों बैठे,

मेरा तो और ना कोई,

तुम्हारे लाखों दीवाने,

मेरा तो और ना कोई,

निगाहें फेर क्यो बैठे,

मेरा तो और ना कोई........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।