छाई रे खाटू नगर में बहार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छाई रे खाटू नगर में बहार,

श्याम मिलन की रुत आई,

आया फागुण का रंगीला त्यौहार,

श्याम मिलन की रुत आई,

छाई रे खाटू नगर मे बहार,

श्याम मिलन की रुत आई ॥

जो हैरान जो है परेशान,

सुनता सभी की खाटु का श्याम,

फागुण में लगती अदालत बड़ी,

बनते है काम यहाँ हर एक घडी,

तुम भी आना फागुण में हर बार,

श्याम मिलन की रुत आई,

छाई रे खाटू नगर मे बहार,

श्याम मिलन की रुत आई ॥

जिन नैनो की ये है ज्योति,

रौशनी उनकी कम ना होती,

ये ही उजाला ये ही है किरण,

किरपा से इनकी बनता जीवन,

इनके होते ना होता अंधकार,

श्याम मिलन की रुत आई,

छाई रे खाटू नगर मे बहार,

श्याम मिलन की रुत आई ॥

क्या राजा क्या है फ़क़ीर,

इनके ही हाथों सबकी तक़दीर,

ये ही तो लेख सारे लिखता है,

ये ही तो किस्मत बदलता है,

ये ब्रम्हा और विष्णु अवतार,

श्याम मिलन की रुत आई,

छाई रे खाटू नगर मे बहार,

श्याम मिलन की रुत आई॥

केवट बना और सौंप दे पतवार,

नैया होगी ना तेरी मझधार,

नैया कोई तेरी रोक ना पाए,

दावा है ‘निर्मल’ का होगी ये पार,

सबकी नैया का खेवनहार,

श्याम मिलन की रुत आई,

छाई रे खाटू नगर मे बहार,

श्याम मिलन की रुत आई॥

छाई रे खाटू नगर में बहार,

श्याम मिलन की रुत आई,

आया फागुण का रंगीला त्यौहार,

श्याम मिलन की रुत आई,

छाई रे खाटू नगर मे बहार,

श्याम मिलन की रुत आई ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।