ये कुञ्ज गली सँकरी सँकरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये कुञ्ज गली सँकरी सँकरी,

छुप गया कान्हाँ पकड़ी पकड़ी,

तेरी चोरी हो श्याम,

ढूँढा सारा गाँव हो, ढूँढा सारा गाँव हो,

ना श्याम मिले ना बाँसुरिया,

ना बाँसुरिया की मीठी तान हो,

ढूँढा सारा गाँव हो, ढूँढा सारा गाँव हो.....

तुझे पल पल चाहूँ तेरी शरण में आऊँ,

जो दिखे श्याम तो पगली हो जाऊँ,

तुझपे अर्पण, मेरे तन मन,

दिखे मुझको दर्पण दर्पण,

तेरी सूरत श्याम हो,

ढूँढा सारा गाँव हो, ढूँढा सारा गाँव हो.....

चाहे जहाँ भी जाऊँ तुझमे खो जाऊँ,

मेरे नटखट मोहन, तुझे भूल ना पाऊँ,

अब दूर करो मेरी उलझन,

पाऊँ तुमको हर जनम जनम,

मेरे घनश्याम हो,

ढूँढा सारा गाँव हो, ढूँढा सारा गाँव हो......

ये कुञ्ज गली सँकरी सँकरी,

छुप गया कान्हाँ पकड़ी पकड़ी,

तेरी चोरी हो श्याम,

ढूँढा सारा गाँव हो, ढूँढा सारा गाँव हो,

ना श्याम मिले ना बाँसुरिया,

ना बाँसुरिया की मीठी तान हो,

ढूँढा सारा गाँव हो, ढूँढा सारा गाँव हो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।