मेरे श्याम की महिमा को

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज़ :- दिलदार कन्हैया ने

मेरे श्याम की महिमा को कोई जान ना पाया है,

जिसने माना तुझको उसने अपनाया है.....

वो नरशी भक्त तेरा टूटी गाड़ी लेके चला,

सवा सवा मण का तूने नानी का भात भरा,

गाड़ी हांके जिसने सारथी बनाया है,

जिसने माना तुझको उसने अपनाया है.....

वो भक्त सुदामा था जिसके तू गले से मिला,

मुठिका चावल की ली झुपड़ा भी महल था बना,

तेरे ही चलाये चले घर जिसने बनाया है,

जिसने माना तुझको उसने अपनाया है......

वो राजमहल राजा वनवाशी बन के चला,

सबरी के घर जाके उसका भी दास बना,

“कविराज” के भी घर आ उसने भी बुलाया है,

जिसने माना तुझको उसने अपनाया है.......

“आशीष जोशी (कविराज)”

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।