तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं ना दूजा कोई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं,

ना दूजा कोई द्वार ना दिखे......

तुझ बिन जीना भी क्या जीना,

तेरा दर ही मेरा ठिकाना,

हो तेरे दर को मै....

तेरा दर्शन जब मै पाऊ,

दुनिया के गम भूल ही जाऊ,

हो तेरे दर को मै....

इतनी कृपा बस हम पर कर दे,

नाम तेरा गाऊ मुझे यही वर दे,

हो तेरे दर को मै....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।