दो नैना घनश्याम के कटीले है कटार से

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे नैना, दो नैना,

मुकुट सिर मोर का,

मेरे चित चोर का,

दो नैना, नैना, नैना,

दो नैना घनश्याम के,

कटीले हैं कटार से,

मुकुट सिर मोर का,

मेरे चित चोर का,

दो नैना, नैना, नैना,

दो नैना, घनश्याम के,

कटीले हैं कटार से.....

आजा के भर लूँ तुझे,

अपनी बाहों में,

आजा छिपा लूँ तुझे,

अपनी निगाहों में,

दीवानों ने विचार के,

कहा ये पुकार के,

दो नैना, नैना, नैना,

दो नैना, घनश्याम के,

कटीले हैं कटार से......

रास बिहारी नहीं,

तुलना तुम्हारी,

तुमसा ना देखा कोई,

पहले अगाड़ी,

के लूनराई वार के,

के नज़रें उतार के,

दो नैना, नैना, नैना,

दो नैना, घनश्याम के,

कटीले हैं कटार से.......

प्रेम लजाए तेरी,

बाँकी अदाओं पर,

फूल घटाएं तेरी,

तिरछी निगाहों पर,

की सौ चाँद वार के,

दीवानें गए हार के,

दो नैना, नैना, नैना,

दो नैना, घनश्याम के,

कटीले हैं कटार से........

मुकुट सिर मोर का,

मेरे चित चोर का,

दो नैना, नैना, नैना,

दो नैना घनश्याम के,

कटीले हैं कटार से।

मुकुट सिर मोर का,

मेरे चित चोर का,

दो नैना, नैना, नैना,

दो नैना, घनश्याम के,

कटीले हैं कटार से........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।