कन्हैया दौड़े आते है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - आज मेरे यार की शादी है

अपने भगत के आंख में आंसू देख न पाते है,

कन्हैया दौड़े आते है......

जहाँ में शोर ऐसा नही कोई श्याम जैसा,

जहाँ के मालिक है ये सभी से वाकिफ है ये,

धर्म पताका..

धर्म पताका निज हाथो से प्रभु फैराते है,

कन्हैया दौड़े आते है,

अपने भगत के आंख में आंसू देख न पाते है,

कन्हैया दौड़े आते है......

गए जो भूल इनको धीर नही उनके मन की,

तिजोरी लाख भरी हो मोटारे महल खड़े हो,

हीरे मोती..

हीरे मोती से मेरे भगवन नही ललचाते है,

कन्हैया दौड़े आते है,

अपने भगत के आंख में आंसू देख न पाते है,

कन्हैया दौड़े आते है......

याद कर जग की गाथा पार्थ के रथ को हाका,

दिन पांचाली हारी बढ़ा दी उसकी सारी,

ध्रुव प्रहलाद..

ध्रुव प्रहलाद नरसी और मीरा टेर लगाते है,

कन्हैया दौड़े आते है,

अपने भगत के आंख में आंसू देख न पाते है,

कन्हैया दौड़े आते है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।